दर्द और तन्हाई शायरी
दर्द और तन्हाई शायरी
टूटे दिल और जुदाई के एहसासों को बयां करती दर्द भरी शायरी।
दर्द और तन्हाई शायरी
तूने तो एक पल में पराया बना दिया, हम उम्र भर अपनी ही वफ़ा पर रोते रहे।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
भीगी हुई आँखों में एक उम्मीद सी जगी थी, फिर याद आया कि वो शख्स तो कभी का जा चुका है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
तेरी बेवफ़ाई का शिकवा किससे करें ऐ दिल, यहाँ तो आईना भी अब हमारी शकल नहीं पहचानता।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
हँसते हुए चेहरों में गहरे राज़ होते हैं, दबे हुए सीने में टूटे साज़ होते हैं, जो कह न सके हम कभी किसी से, वही आंसू आँखों के आखिरी लिबास होते हैं।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
अब तो तन्हाई भी हमसे कतराने लगी है, तुम्हारी यादें इस कदर दिल दुखाने लगी हैं, सोचा था वक्त के साथ भर जाएंगे ज़ख्म, पर यहाँ तो हर सांस नया दर्द जगाने लगी है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
हमने तो उम्र गुज़ार दी तेरी राह तकते-तकते, पर तूने एक पल न लगाया मुझे भुलाने में, अब किस से कहें अपना दर्द-ए-दिल, यहाँ हर कोई मशगूल है अपनी ही महफिल सजाने में।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
ज़ख्म इतने गहरे हैं कि दिखाए नहीं जाते, आँसू भी आँखों में अब छुपाए नहीं जाते, कैसी कशमकश में डाल दिया है ज़िंदगी ने, कि अब तो हँसते हुए भी दिन बिताए नहीं जाते।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
एक उम्मीद की शम'अ जलाई थी हमने, वही हवा का झोंका उसे बुझा गया, जिसके सहारे जीना सीखा था हमने, वही शख्स हमें जिंदा लाश बना गया।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
मोहब्बत का सिला कुछ इस तरह मिला हमें, कि खुद को खो दिया उन्हें पाने की चाह में, अब वो पूछते हैं कि उदास क्यों रहते हो, कोई पूछे उनसे कि ज़ख्म किसने दिए राह में।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
साँसों का चलना भी अब एक सज़ा सा लगता है, ये दिल धड़कने पर भी बेवफा सा लगता है, न जाने किस मोड़ पर ले आई है ये ज़िंदगी, कि खुद का वजूद भी अब पराया सा लगता है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
चेहरे पर झूठी मुस्कान सजाना सीख लिया है, भीड़ में भी तन्हाई को छुपाना सीख लिया है, अब कोई नहीं पूछता कि हाल क्या है मेरा, क्योंकि हमने भी हर सवाल पर मुस्कुराना सीख लिया है।
— अज्ञात