दर्द और तन्हाई शायरी
दर्द और तन्हाई शायरी
टूटे दिल और जुदाई के एहसासों को बयां करती दर्द भरी शायरी।
दर्द और तन्हाई शायरी
दिल के दर्द को अल्फ़ाज़ों में पिरोया है हमने, जब सब सो रहे थे तब रातों में रोया है हमने। खुदा करे किसी को इश्क़ में ऐसा दर्द न मिले, जिसके लिए सब कुछ छोड़ा वही अलविदा कह दे।
— अल्फाज़
#dard #sad #tanhai #judai #brokenheart
दर्द और तन्हाई शायरी
इंतज़ार की घड़ियाँ बहुत लंबी हो जाती हैं, जब कोई अपना दूर हो और उम्मीदें टूट जाती हैं। अब किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हम, तन्हाई के साए में ही सुकून तलाशते हैं हम।
— शायर-ए-दिल
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दर्द और तन्हाई शायरी
इंतज़ार की घड़ियाँ बहुत लंबी हो जाती हैं, जब कोई अपना दूर हो और उम्मीदें टूट जाती हैं। अब किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हम, तन्हाई के साए में ही सुकून तलाशते हैं हम।
— मीर तक़ी मीर
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दर्द और तन्हाई शायरी
ज़िंदगी ने इतने ज़ख़्म दिए हैं मुस्कुराने पर भी डर लगता है, कहीं फिर कोई अपना बनकर दिल न तोड़ दे। खुदा करे किसी को इश्क़ में ऐसा दर्द न मिले, जिसके लिए सब कुछ छोड़ा वही अलविदा कह दे।
— जॉन एलिया
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दर्द और तन्हाई शायरी
मुहब्बत में मिले धोखे का कोई इलाज नहीं, टूटे दिल पर किसी का कोई राज़ नहीं। अब तो सिर्फ यादें हैं जो सीने से लगी रहती हैं, सूनी आँखें रात भर रास्ता तकती रहती हैं।
— बशीर बद्र
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दर्द और तन्हाई शायरी
काश वो समझ पाते मेरे ख़ामोश अश्कों की ज़ुबां, तो आज इस तरह तन्हा न भटकता मेरा कारवां। वक़्त के साथ ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशान रह जाते हैं, टूटे हुए सपनों के सिर्फ ख़्वाब रह जाते हैं।
— मुनव्वर राना
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दर्द और तन्हाई शायरी
कभी कभी हँसते हुए चेहरे के पीछे समंदर छुपा होता है, दर्द का आलम वही जाने जो तन्हा रातों में रोता है। अब किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हम, तन्हाई के साए में ही सुकून तलाशते हैं हम।
— गुलज़ार
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दर्द और तन्हाई शायरी
अब तो ख़ामोशी ही सबसे बेहतर जवाब लगती है, क्योंकि लफ़्ज़ों की क़ीमत हर किसी को समझ नहीं आती। वक़्त के साथ ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशान रह जाते हैं, टूटे हुए सपनों के सिर्फ ख़्वाब रह जाते हैं।
— मिर्ज़ा ग़ालिब
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दर्द और तन्हाई शायरी
अब तो ख़ामोशी ही सबसे बेहतर जवाब लगती है, क्योंकि लफ़्ज़ों की क़ीमत हर किसी को समझ नहीं आती। वक़्त के साथ ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशान रह जाते हैं, टूटे हुए सपनों के सिर्फ ख़्वाब रह जाते हैं।
— बशीर बद्र
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दर्द और तन्हाई शायरी
कभी कभी हँसते हुए चेहरे के पीछे समंदर छुपा होता है, दर्द का आलम वही जाने जो तन्हा रातों में रोता है। अब किसी से कोई उम्मीद नहीं रखते हम, तन्हाई के साए में ही सुकून तलाशते हैं हम।
— अकबर इलाहाबादी
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दर्द और तन्हाई शायरी
काश वो समझ पाते मेरे ख़ामोश अश्कों की ज़ुबां, तो आज इस तरह तन्हा न भटकता मेरा कारवां। वक़्त के साथ ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशान रह जाते हैं, टूटे हुए सपनों के सिर्फ ख़्वाब रह जाते हैं।
— काव्या
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